उतरा है अभी अर्श से….

                      *ग़ज़ल* उतरा है अभी अर्श से अभ्र रवाँ रहने दो, ज़ख्मों को अभी यूँ ही, खामोश ज़ुबाँ रहने दो। तुम ने अभी सुना नहीं, टूटे दिल का साज, कुछ रोज़ मन की सरजमीं पर, रंगे खिज़ा रहने दो। गर बढ़ रहा है दर्द तो, […]

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