नोट बंदी कारन सायकल इंडस्ट्री खतरे में, 50 से 70 प्रतिशत काम हुआ खत्म

Ludhiana

साइकिल का चक्का हुआ जाम**इंडस्ट्री में नई करंसी न मिलने से उत्पादन व आर्डर पचास प्रतिशत गिरा**उद्यमियों के पास लेबर को वेतन देने को नई करंसी नहीं, सप्ताह में दो दिन छुट्टी देने लगे उद्यमी ताकि लेबर बैंक लाइन में लगकर पैसे ले सके

देश में नोटबंदी के बाद पैदा हुए करंसी क्रंच के कुप्रभाव सामने आने शुरू हो गए है। दुनिया में साइकिल निर्माण करने वाले प्रमुख औद्योगिक शहर लुधियाना में नोटबंदी का असर ऐसा पडा है कि यहां की इंडस्ट्री की प्रोडक्शन पचास प्रतिशत कम हो चुकी है तथा पचास से सत्तर प्रतिशत तक आर्डर कम हो चुके है। साइकिल निर्माता उद्यमियों का कहना है कि 7 से 10 तारीख वेतन डे होने के मद्देनजर उनके पास लेबर को वेतन देने के लिए नई करंसी नहीं है, पुराने वो ले नहीं रहे है। बैंक आकाउंट न होने के कारण चैक नहीं ले रहे जबकि जिनके है उन्हें बैंकों में घंटों लाइन में लगने के बाद भी नो कैश का सामना करना पड रहा है। 

प्रमुख साइकिल निर्माता कंपनी नोवा साइकिल के हरमोहिंदर सिंह पाहवा ने बताया कि नोटबंदी के बाद साइकिल इंडस्ट्री की सेल 50 से 70 प्रतिशत तक कम हो चुकी है तथा आने वाले दिनों में भी हालात  जल्द सुधरते नहीं दिख रहे है। अधिकतर लेबर कैश पर निर्भर है। वे पुरानी करंसी की बजाये नई करंसी मांग रहे है। लेकिन हमारे पास नई करंसी की  उपलब्धता नहीं हो रही है। अभी तो आम आदमी दैनिक खर्च में उलझा हुआ है, ऐसे में साइकिल की डिमांड भी कम हो चुकी है व काम आधा रह गया है। सप्लायर्स को देने के लिए भी पैसे नहीं है।

नोटबंदी को हुए एक महीना होने को है लेकिन कुछ सुधार नहीं है। लेबर को वेतन देने के लिए पैसे नहंी है। हमे अपने पैसे बैंक से लेने के लिए मिन्नतें करनी पड रही है। सरकार की कंरट अकाउंट पर पचास हजार की लिमिट पर केवल दस हजार रूपये मिल रहेे है। बडी फैक्टिरयों में इतना तो फुटकल खर्च में चला जाता है जोकि चैक से नहीं हो सकता। हमने लेबर को सप्ताह में दो दिन अवकाश कर दिया है। लेकिन लाइन में लगने के बावजूद पैॅसे न मिलने से लेबर फिर छुट्टी कर लेती है। चालीस प्रतिशत लेबर बैंकों के बाहर लाइन में खडी है। एक महीने में स्थिति सुधरी तो फैक्टिरयां बंद होने को मजबूर हो जाएंगी।

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