हम बात तो करते Digital India की लेकिन पुरे गाँव में एक भी बल्ब नही (विडिओ)

Chhatarpur Madhya Pradesh
 आजादी से लेकर आज तक गांव में नहीं पहुंची रोशनी आखिर मोमबत्ती औऱ डिब्बी की रोशनी में कैसे सबरेगा मासूमो का भविष्य*

छतरपुर(गौरव मिश्रा) एक और देश में बड़े बड़े वादे और दावे किए जा रहे हैं देश को डिजिटल और हाईटेक करने की बात कही जा रही है साथ ही साथ 24 घण्टे बिजली देने का वादा किया जाता है ऐसे में मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले के खजुराहो से एक ऐसा मामला निकलकर सामने आया है जहां आजादी से लेकर आज तक लाइट नहीं पहुंची मध्य प्रदेश के विश्व पर्यटन नगरी खजुराहो के समीप का एक ऐसा गांव जहां आजादी से लेकर आज तक नहीं पहुंची बिजली मोमबत्ती एवं डिब्बी की रोशनी में पढ़ने को मजबूर है बच्चे कई बार आवेदन करने के बावजूद भी नहीं सुन रहा विद्युत विभाग मजबूरन जंगली जीवन जीने को मजबूर हैं ग्रामीण!
विओ- एक और भारत सरकार डिजिटल इंडिया एवं बेटी पढ़ाओ बेटी बचाओ एवं साक्षरता जैसे अभियान को चलाकर देश को विकसित देशों में लाकर खड़ा कर रही है तो वही मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले से कुछ ऐसी तस्वीरें निकल कर सामने आई है जो ना सिर्फ सरकार की तमाम योजनाओं पर सवाल खड़ा करती हैं बल्कि यह भी दर्शाती है कि आज के युग में जहां बच्चे इंटरनेट लैपटॉप एवं अन्य सुविधाओं से लेश सामग्रियों से अपनी पढ़ाई कर रहे हैं ऐसे में कुछ बच्चे ऐसे भी है जो कम रोशनी में अपने उज्जवल भविष्य को गढ़  रहे हैं!
विश्व पर्यटन स्थल खजुराहो से महज 7 किलोमीटर दूर वार्ड न.4 के अंतर्गत आने बाला चंडीपुरवा जो आजादी से लेकर आज तक अंधेरे में जीवन यापन कर रहे है लेकिन किसी ने भी इस छोटे से पुरवा में रह रहे ग्रामीणों को मुख्यधारा में जोड़ने की कोशिश नहीं की!
 ग्रामीणों का कहना है हर 5 साल बाद चुनाव आने से पहले बहुत नेता आते हैं और लाइट दिलाने की बात कर वोट मांगते हैं लेकिन आज तक ना तो कोई नेता दोबारा यहां लौटकर आया और ना किसी ने लाइट की कोई व्यवस्था कराई!
गांव में ही रहने वाले 75 वर्षीय एक बुजुर्ग महादेव पाल से जब हमने पूछा की गांव में लाइट कब से नहीं है तो उन्होंने बताया कि जब से उनका जन्म हुआ तब से वह गांव में अंधेरा ही देख रहे हैं और दुख इस बात का है की उनकी आने वाली पीढ़ी भी अंधेरे में ही रह रही है!
गांव में ही रहने बाले बच्चो ने बताया कि उनका जब से जन्म हुआ है तब से उन्होंने लाइट नही देखी यहा बताया कि ऐसे ही लालटेन ओर मोमबत्ती की रोशनी में ही पढ़ाई करते है हम लोग
कुछ दिनों पहले ही खजुराहो में अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव का आयोजन किया गया था जिसमें देश विदेश के कई बड़े सेलिब्रिटी पहुंचे और कुछ दिनों तक यहां जमकर लोगों का जमावड़ा रहा और खजुराहो किसी दुल्हन की तरह सजा रहा वही खजुराहो से महज 7 किलोमीटर दूर इस गांव में लोग हमेशा की तरह अंधेरे में ही जीवन जीने को मजबूर थे!

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