उतरा है अभी अर्श से….

Dr Priya Sufi ki Gazal Kavi Darbar (ਕਵੀ ਦਰਬਾਰ)

                      *ग़ज़ल*

उतरा है अभी अर्श से अभ्र रवाँ रहने दो, ज़ख्मों को अभी यूँ ही, खामोश ज़ुबाँ रहने दो।
तुम ने अभी सुना नहीं, टूटे दिल का साज, कुछ रोज़ मन की सरजमीं पर, रंगे खिज़ा रहने दो।
गर बढ़ रहा है दर्द तो, यादों को दोहवा, मत रोक इस तूफाँ को, शामिले जां रहने दो।
यह चराग बुझते हुए, यह ढलती हुई शाम, गुमनाम यादों की गली, यूँ ही जवाँ रहने दो।
कहने की नहीं बात कुछ, अब क्या कहें हम, लफ़्ज़ों को कभी वर्क पर, महरूमे- ज़ुबाँ रहने दो।

 

 

 

 

*डॉ प्रिया सूफ़ी*

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