संगीत और कला अकादमी का 43 वा खजुराहो नृत्य समारोह का सुभारम्भ

Madhya Pradesh

मध्य प्रदेश (निर्णय तिवारी) मध्य प्रदेश के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल खजुराहो में सांस्कृतिक बिभाग के सहयोग  एवं उस्ताद अलाउद्दीन खां संगीत और कला अकादमी का 43 वा खजुराहो नृत्य समारोह का सुभारम्भ  हुआ । भारतीय शास्त्रीय नृत्यों पर आधारित इस महोत्सव की शुरुआत खजुराहो में 1976 में हुई. तब से अब तक यह नृत्य समारोह हर वर्ष फ़रवरी-मार्च माह में आयोजित किया जाता है.समारोह में प्रदेश के 10 ख्याति प्राप्त कलाकारो ने अपनी भागीदारी ली है।  जिनके द्धारा नृत्य की अदभुद झलकियाॅ प्रस्तुत की जा रही है । जिसका आगाज बीते रोज 20 फ़रवरी को हुआ जिसमे बुधवार महोत्सब के तीसरे दिन  खजुराहो नृत्य समारोह के मंच पर

सर्वप्रथम लावण्या शंकर कोलम्बटूर के द्वारा भरत्नाट्यम की अलौकिक प्रस्तुति दी गई। जिसमे प्रयुक्त अलौकिक शैली व मुद्राओ ने पूरे समां को स्तर करके रख  दिया कलाकार ने चर्चा पर बताया की  भरतनाट्यम की उत्पति 400 ईसा पूर्व हुई थी जो की भरत मुनि के नाट्य शास्त्र पर आधारित है दक्षिण भारत का सांस्कृतिक नृत्य सारे नृत्यों में भरतनाट्यम सबसे प्राचीन नृत्य है जिसे देवदासियों द्वारा बिकसित किया गया इस नृत्य शैली को चिदंबरम के प्राचीन मंदिर के शिलालेखो में देखा जा सकता है
उपरांत

रंजना यादव ने कत्थक समूह नृत्य प्रस्तुत किया  कत्थक राजस्थान व उत्तर भारत का प्राचीन शैली का नृत्य है जिसका सम्बन्ध मध्य काल  में कृष्ण कथा से हुआ करता था ।

जिसके बाद तीरसि प्रस्तुति
सदाशिव प्रधान, भुवनेश्वर के द्वारा प्रस्तुत  मयूरभंज छाऊ नृत्य ने दर्शको को समाप्त होती परम्परा के अवगत किया चर्चा में पता चला की छाऊ एक आदिवासी नृत्य है जो बंगाल,उडीशा,झारखण्ड का लोकप्रिय नृत्य भी है

अंत में शिंजिनि कुलकर्णी के कथक नृत्य प्रस्तुत दर्शको मन जीत लिया और दर्शक जहा के तहां जमे से प्रतीत हुए

उन्होंने जानकारी में दी
उनके द्वारा अन्तँराष्टीय प्रशिद्ध नगरी मंच के पर अपनी प्रस्तुति देकर वह अपने आपको भाग्यशाली अनुभव करती है। जिन्होने अपने नृत्य साधना के इतिहास में खजुराहो के इस मुक्ताकाशी मंच पर पहली बार अपनी कला का जोहर दिखाया |और स्वीकारा की खजुराहो नृत्य समारोह प्राचीन काल से चला आ रहा है ,जो अभी तक अच्छी  तरह से कायम  रखा हुआ है , इस नृत्य समारोह में भाग लेना ही गर्व की बात है  बहुत ही सुन्दर सा अहसास होता है , कई नृत्यांगना  इसके लिए वर्षों प्रेक्टिस करती हें | और चाहती है। कि मुझे खजुराहो नृत्य समारोह में भाग लेने को मिल जाये  | एवं दर्शको का स्नेह पाकर वे धन्य हो गई  कि आर्थिक मंदी के कारण विदेशी पर्यटको मे इस बार कमी होने के कारन भी मध्यप्रदेश संस्कृति विभाग एवं मध्यप्रदेश संगीत कला अकादमी भोपाल के सहयोग से आयोजित इस समारोह को देखने के लिए कनाडा, फ्रांस, अमेरिका, इंग्लैंड, जर्मनी, जापान जैसे अन्य देशों से कला प्रेमी दर्शक खजुराहो पहुंचे। अधिक से अधिक विदेशी सैलानियो का ताता देखा जा सकता इस फेस्टिवल मे हर साल नयापन बना रहे ,इसके लिए बिभाग द्वारा लगातार प्रयास किये जा रहे है

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