9 जनवरी को अध्यापक भोपाल में करेंगे जंगी प्रदर्शन

Chhatarpur Madhya Pradesh

19-ctp-photo-05छतरपुर(निर्णय तिवारी) अध्यापक संघर्ष समिति की विगत रोज भोपाल के विधायक रेस्ट हाउस के सामने पार्क में बैठक आयोजित की गई। बैठक में अध्यापकों  से जुड़े सभी मुद्दों पर गंभीरता से चर्चा की गई। शासन जिस तरह से अध्यापकों को गुमराह कर रहा है उसके खिलाफ एक मजबूत आंदोलन रणनीति बनाई गई। 5 जनवरी को जिला स्तर पर शिक्षा विभाग में संविलियन का संकल्प दिवस मनाया जाएगा तथा 9 जनवरी को भोपाल में जंगी प्रदर्शन होगा। प्रदेश शासन को अध्यापक संघर्ष समिति ने अपनी मंशा से अवगत करा दिया है।

शासकीय अध्यापक संघ के जिला उपाध्यक्ष एवं मीडिया प्रभारी आरडी बाथम ने बताया कि विगत रोज अध्यापक संघर्ष समिति की भोपाल में बैठक रखी गई थी। बैठक में प्रदेश भर के पदाधिकारी शामिल हुए। विभिन्न बिंदुओं पर मंथन होने तथा अध्यापकों की प्रमुख समस्याओं को चर्चाओं में रखने के बाद यह बात सामने आयी कि जब तक पूरी ताकत के साथ शासन से अपनी समस्याएं हल कराने का प्रयास नहीं होगा तब तक इसी तरह विसंगतिपूर्ण आदेश जारी होते रहेंगे। बैठक में सर्वसम्मति से अध्यापक संघर्ष समिति के अध्यक्षीय मण्डल ने तय किया कि 5 जनवरी को जिला स्तर पर शिक्षा विभाग में संविलियन के संकल्प दिवस मनाया जाएगा तथा 9 जनवरी को भोपाल में प्रदेश भर के अध्यापक इकट्ठा होकर जंगी प्रदर्शन करेंगे। बैठक में शासकीय अध्यापक संघ के प्रदेशाध्यक्ष ब्रजेश शर्मा, राज्य   अध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष जगदीश यादव, अध्यापक संविदा शिक्षक संघ के प्रांताध्यक्ष मनोहर दुबे तथा अध्यापक कांग्रेस के प्रांताध्यक्ष राकेश नायक का मार्गदर्शन मिला। छतरपुर से बैठक शासकीय अध्यापक संघ के जिलाध्यक्ष केके अवस्थी, प्रांतीय महामंत्री आरके शर्मा, उपाध्यक्ष आरडी बाथम, संयुक्त सचिव हरूण तिर्की शामिल रहे।

सरकार कर रही अध्यापकों को बदनाम

अध्यापक संघर्ष समिति ने कहा कि समाज में उन्हें बदनाम करने की सरकार ने पूरी कोशिश की है। छठवें वेतनमान के विसंगतिपूर्ण गणना पत्रक जारी करने के कारण अध्यापकों को मजबूरन अपना हक लेने के लिए प्रदर्शन करने पड़ते हैं लेकिन सरकार समाज में यह साबित करना चाहती है कि अध्यापकों को सबकुछ देने के बावजूद उन्हें हड़ताल एवं धरना प्रदर्शन की आदत हो गई है। संघर्ष समिति के अध्यक्षीय मण्डल ने अपने सभी पदाधिकारियों को निर्देशित किया कि वे लोगों तक यह संदेश पहुंचाएं कि वास्तविकता क्या है। हकीकत यह है कि सरकार जान-बूझकर परेशान करने की गरज से तमाम भ्रांतियां फैला रही है। यही वजह है कि 24 दिसम्बर 2015 को महाराष्ट्र में छठवें वेतनमान की घोषणा करने के बावजूद एक साल होने पर भी इसका लाभ अध्यापकों को नही मिल रहा।

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