सरपंचों की भूख हड़ताल आज से जारी

Madhya Pradesh

img_20161218_145536मध्य प्रदेश(निरणे तिवारी )नीय जनपद पंचायत के सभागार में रविवार 18 दिसम्बर की दोपहर को जनपद अध्यक्ष रामविशाल बाजपेई और उपाध्यक्ष छोटेलाल पाल उर्फ बाबा भारती की उपस्थिति में जनपद क्षेत्र की विभिन्न पंचायतों के दर्जनों सरपंचों की बैठक का आयोजन किया गया। बैठक के दौरान गत रविवार 11 दिसम्बर को विभिन्न मांगों को लेकर दिये गए ज्ञापन पर सम्बधीजन द्वारा कोई तबज्जो न दिये जाने पर घोर नाराजगी व्यक्त करते हुए सोमवार 19 दिसम्बर को दिन के 11 बजे से  जनपद अध्यक्ष श्री बाजपेई के नेतृत्व में स्थानीय तहसील परिसर में क्रमिक भूख हड़ताल करने का निर्णय लिया गया।
रविवार को आयोजित बैठक में उपस्थित समस्त सरपंचों ने पंचायत के अंतर्गत कराये जाने वाले विभिन्न निर्माण कार्यों के दौरान आने वाली समस्यायों के बारे में विस्तृत चर्चा की।इस दौरान सभी ने निर्णय लिया की हमें अपनी विभिन्न समस्याओं से लड़ने के लिये संघ की आवश्यता है।बैठक में जनपद स्तर का सरपंच संघ तैयार करने पर आम सहमति बनी और हर माह सरपंचों की बैठक आयोजित करने का निर्णय
लिया गया।इस दौरान चालू माह की आगामी 25 तारीख को पुनः बैठक आयोजित कर संघ का गठन करने और संघ के अध्यक्ष,उपाध्यक्ष,सचिव,सहसचिव सहित अन्य पदाधिकारियों के चयन करने की बात रखी गई।
जानकारी  हो कि जनपद अध्यक्ष  बाजपेयी के साथ पहरा चौकी में पदस्थ एएसआई सन्तोष शर्मा द्वारा कथित अभद्रता का आरोप लगाते हुए 11 दिसम्बर को जनपद अध्यक्ष रामविशाल बाजपेयी और भाजपा नेता मनोज दीक्षित की अगुवाई में दर्जनों सरपंचों ने शर्मा के खिलाफ निलम्बन की कार्यवाही को लेकर मुख्यमन्त्री म.प्र. शासन के नाम गौरिहार तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा था। गत रविवार को सौंपें गए ज्ञापन में चौकी प्रभारी पर आवश्यक कार्यवाही के अलावा पंचायत में निर्माणाधीन कार्यों के लिये रेत परिवहन सम्बंधी पिटपास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सरल करने,जनपद क्षेत्र में गत माहों में हुए रेत के अवैध उत्खनन की उच्चस्तरीय जाँच कराने, पंचायत अंतर्गत होने वाले खनिज के अवैध उत्खनन के सम्बन्ध में सरपंचों की शिकायत को गम्भीरता से लिए जाने सम्बन्धी मांगे भी सरपंचों द्वारा की गई थी।
सरपंचों ने शासन-प्रशासन को एक सप्ताह पूर्व ज्ञापन के माध्यम से आगाह भी किया था कि यदि हमारी माँगे पूरी नही की जाती है तो, आने वाले समय में हम सभी भूख हड़ताल करने को मजबूर हो जायेंगें,
जिसके लिये शासन-प्रशासन स्वयम जिम्मेदार होगा।

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